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Darbhanga-Samastipur Weather Update: खेत तैयार, लेकिन बारिश का इंतजार; धान रोपनी में देरी से किसान परेशान

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दरभंगा और समस्तीपुर जिले में मानसून की धीमी रफ्तार से धान रोपनी प्रभावित हो रही है। महंगे डीजल और मजदूरी के बीच किसान अब अच्छी बारिश की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

दरभंगा/आलम की खबर:मिथिलांचल के दरभंगा और समस्तीपुर जिले में मानसून की धीमी रफ्तार ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेत पूरी तरह तैयार हैं, धान की नर्सरी भी कई जगहों पर तैयार हो चुकी है, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण धान रोपनी का काम गति नहीं पकड़ पा रहा है। किसान सुबह होते ही आसमान की ओर नजर टिकाए रहते हैं और उम्मीद करते हैं कि जल्द ही अच्छी बारिश होगी, ताकि खेती का सबसे महत्वपूर्ण समय शुरू हो सके।

दरभंगा जिले के बहादुरपुर, हनुमाननगर, सदर, जाले सहित कई प्रखंडों में किसानों ने समय पर खेतों की जुताई करा ली है। खेतों की मिट्टी को रोपनी के लिए तैयार किया जा चुका है, लेकिन पानी के अभाव में किसान आगे का काम नहीं कर पा रहे हैं। वहीं समस्तीपुर जिले के भी कई ग्रामीण क्षेत्रों में यही स्थिति बनी हुई है। किसान खेत तैयार कर चुके हैं, लेकिन मानसून की बेरुखी के कारण धान की रोपनी शुरू नहीं हो पा रही है।

किसानों का कहना है कि इस समय खेतों में पानी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। धान की खेती के लिए पर्याप्त नमी जरूरी होती है, लेकिन बारिश नहीं होने से खेतों की ऊपरी सतह सूखने लगी है। कई जगहों पर मिट्टी में दरारें दिखाई देने लगी हैं। किसान चाहते हैं कि जल्द से जल्द अच्छी बारिश हो, ताकि रोपनी का काम शुरू किया जा सके।

डीजल और मजदूरी की बढ़ती कीमत बनी परेशानी

बारिश में देरी के साथ किसानों की आर्थिक परेशानी भी बढ़ रही है। जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा है, वे पंपसेट से खेतों में पानी पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन डीजल की बढ़ी कीमत उनके खर्च को बढ़ा रही है।

किसानों के अनुसार, खेत में पानी पहुंचाने के लिए डीजल पर काफी पैसा खर्च हो रहा है। इसके अलावा मजदूरों की कमी और बढ़ी हुई मजदूरी भी खेती की लागत बढ़ा रही है। छोटे और मध्यम किसानों के लिए यह स्थिति और ज्यादा चुनौतीपूर्ण बन गई है।

दरभंगा के एक किसान ने बताया कि खेत की तैयारी, बीज, खाद और जुताई में पहले ही काफी खर्च हो चुका है। अगर समय पर बारिश नहीं हुई तो दोबारा नर्सरी तैयार करनी पड़ सकती है, जिससे किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।

समस्तीपुर में भी किसान आसमान की ओर लगाए हैं नजर

समस्तीपुर जिले में भी किसान मानसून की अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। जिले के ग्रामीण इलाकों में धान की खेती मुख्य फसल मानी जाती है। यहां बड़ी संख्या में किसान खरीफ सीजन की शुरुआत धान रोपनी से करते हैं।

किसानों का कहना है कि मानसून अगर समय पर सक्रिय हो जाता है तो धान की खेती बेहतर तरीके से हो सकती है। लेकिन बारिश में लगातार देरी होने से खेती का पूरा चक्र प्रभावित होने का डर बना हुआ है।

कई किसान खेतों में पहुंचकर नमी की स्थिति देख रहे हैं। कुछ किसान निजी संसाधनों से सिंचाई कर रहे हैं, लेकिन हर किसान के लिए यह संभव नहीं है। ऐसे में सभी की उम्मीद प्राकृतिक बारिश पर टिकी हुई है।

मघा नक्षत्र से किसानों को उम्मीद

ग्रामीण इलाकों में किसान परंपरागत रूप से नक्षत्रों के आधार पर भी मौसम का अनुमान लगाते हैं। वर्तमान समय में किसान मघा नक्षत्र की बारिश को लेकर उम्मीद लगाए हुए हैं। बुजुर्ग किसानों का मानना है कि मघा में अच्छी बारिश होने से धान की खेती को काफी फायदा मिलता है।

किसानों का कहना है कि अगर आने वाले दिनों में अच्छी बारिश हो जाती है तो दरभंगा, समस्तीपुर सहित पूरे मिथिलांचल में धान रोपनी का काम तेजी से शुरू हो जाएगा। खेतों में फिर से हलचल दिखाई देगी और गांवों में खेती का माहौल लौट आएगा।

मौसम विभाग के अनुसार मानसून में आएगी तेजी

मौसम विभाग के अनुसार बिहार में मानसून धीरे-धीरे सक्रिय हो रहा है। आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी होने की संभावना जताई गई है। अगर पूर्वानुमान के अनुसार बारिश होती है तो किसानों को बड़ी राहत मिल सकती है।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि धान की खेती के लिए समय पर पानी मिलना बेहद जरूरी है। हालांकि अभी भी किसानों के पास रोपनी के लिए पर्याप्त समय है, लेकिन लगातार देरी होने पर उत्पादन पर असर पड़ सकता है।

किसानों की उम्मीद अभी भी कायम

तमाम परेशानियों के बावजूद दरभंगा और समस्तीपुर के किसानों ने उम्मीद नहीं छोड़ी है। गांवों में सुबह की शुरुआत अब भी मौसम देखने से होती है। किसान बादलों की ओर देखते हैं और अच्छी बारिश की कामना करते हैं।

मिथिलांचल के किसानों के लिए बारिश सिर्फ मौसम की घटना नहीं, बल्कि पूरे साल की आर्थिक स्थिति से जुड़ी होती है। एक अच्छी मानसूनी बारिश खेतों में हरियाली ला सकती है और किसानों के चेहरे पर मुस्कान वापस ला सकती है।

फिलहाल दरभंगा और समस्तीपुर के किसान बस एक अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। खेत तैयार हैं, बीज तैयार हैं और किसान भी तैयार हैं। अब सिर्फ बादलों के बरसने का इंतजार है।

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दरभंगा और समस्तीपुर जैसे कृषि प्रधान जिलों में मानसून की देरी किसानों की चिंता बढ़ाने वाली है। धान की खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर रहती है और शुरुआती समय में पानी नहीं मिलने से किसानों की लागत बढ़ जाती है।

डीजल और मजदूरी की बढ़ती कीमतों ने पहले ही किसानों की परेशानी बढ़ाई हुई है। ऐसे में समय पर अच्छी बारिश किसानों के लिए सबसे बड़ी राहत साबित हो सकती है।

मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार आने वाले दिनों में मानसून सक्रिय होने की उम्मीद है। अगर अच्छी बारिश होती है तो मिथिलांचल के खेतों में फिर से खेती की रौनक लौट सकती है।

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